Grow Peas in Pot: गमले में भरपूर मटर उगाने की पूरी Guide
Grow Peas in Pot: मटर एक ऐसी सब्जी है जिसे लगभग हर भारतीय घर में पसंद किया जाता है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि इसे उगाने के लिए बड़े खेत या ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती। अगर आपके पास छत, बालकनी या घर का कोई धूप वाला कोना है, तो आप आसानी से गमले में मटर उगा सकते हैं। घर में उगाई गई ताजी मटर न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि यह केमिकल-फ्री भी होती है। सही मौसम, अच्छी मिट्टी और थोड़ी सी देखभाल के साथ एक साधारण गमले से भी अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है।
सही गमला और मिट्टी का चुनाव सफलता की पहली सीढ़ी है
मटर की जड़ें बहुत गहराई तक नहीं जातीं, लेकिन उन्हें फैलने के लिए पर्याप्त जगह चाहिए होती है। इसलिए कम से कम 10 से 12 इंच गहरा और चौड़ा गमला चुनना बेहतर माना जाता है। यदि आप ग्रो बैग का उपयोग कर रहे हैं, तो वह भी अच्छा विकल्प हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि गमले में पानी निकलने के लिए पर्याप्त छेद हों ताकि अतिरिक्त नमी जमा न हो सके।
मिट्टी तैयार करते समय सामान्य बगीचे की मिट्टी में वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद मिला लें। मटर को भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी पसंद होती है। भारी और सख्त मिट्टी में पौधों की ग्रोथ धीमी हो सकती है। मिट्टी तैयार होने के बाद उसे गमले में भरकर एक दिन के लिए छोड़ देना अच्छा रहता है ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए।
बीज बोने का सही तरीका जानना जरूरी है
मटर उगाने के लिए हमेशा अच्छे गुणवत्ता वाले बीजों का उपयोग करना चाहिए। बीजों को बोने से पहले कुछ घंटों के लिए पानी में भिगो देने से अंकुरण तेज हो सकता है। इसके बाद बीजों को लगभग 1 से 2 इंच गहराई में बोएं और उनके बीच पर्याप्त दूरी रखें ताकि पौधों को बढ़ने की जगह मिल सके।

बीज बोने के बाद हल्का पानी दें और मिट्टी को लगातार नम बनाए रखें। सामान्य परिस्थितियों में 7 से 12 दिनों के भीतर अंकुर निकलने शुरू हो जाते हैं। इस दौरान मिट्टी को पूरी तरह सूखने नहीं देना चाहिए, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी देने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे बीज सड़ सकते हैं।
धूप और सहारे का विशेष ध्यान रखें
मटर के पौधों को अच्छी ग्रोथ के लिए रोजाना कम से कम 4 से 6 घंटे धूप की जरूरत होती है। इसलिए गमले को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त सूर्य प्रकाश मिलता हो। धूप की कमी होने पर पौधे कमजोर रह सकते हैं और फलियां कम बन सकती हैं।
मटर एक बेलदार पौधा है, इसलिए जैसे-जैसे यह बढ़ता है, इसे सहारे की जरूरत पड़ती है। इसके लिए बांस की छोटी लकड़ियां, जाली या रस्सी का उपयोग किया जा सकता है। यदि पौधों को सही समय पर सहारा मिल जाए, तो वे बेहतर तरीके से ऊपर बढ़ते हैं और फलियों का उत्पादन भी अच्छा होता है।
इसे भी पढ़ें: Flowering Plants Care: फूल आने के बाद भी क्यों गिर जाते हैं पौधे? जानिए कारण
खाद और पानी का संतुलन बनाए रखें
मटर के पौधे को बहुत ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती, लेकिन समय-समय पर जैविक खाद देने से ग्रोथ बेहतर होती है। हर 20 से 25 दिन में थोड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट या गोबर खाद डालना फायदेमंद रहता है। अधिक नाइट्रोजन वाली खाद का उपयोग करने से पत्तियां ज्यादा निकल सकती हैं लेकिन फलियां कम बन सकती हैं।
पानी देने में भी संतुलन जरूरी है। मिट्टी को नम रखें लेकिन उसमें पानी जमा न होने दें। फूल आने और फलियां बनने के समय पौधों को नियमित नमी की जरूरत होती है, इसलिए इस चरण में विशेष ध्यान देना चाहिए।
कब और कैसे करें मटर की तुड़ाई?
बीज बोने के लगभग 60 से 90 दिनों बाद मटर की फलियां तुड़ाई के लिए तैयार होने लगती हैं। जब फलियां हरी, भरी हुई और मुलायम दिखाई दें, तो उन्हें तोड़ लेना चाहिए। बहुत देर तक पौधे पर छोड़ने से दाने सख्त हो सकते हैं और स्वाद प्रभावित हो सकता है।
नियमित रूप से तैयार फलियां तोड़ते रहने से पौधा नई फलियां बनाना जारी रखता है। यही कारण है कि समय पर तुड़ाई करने से कुल उत्पादन बढ़ सकता है। घर में उगाई गई ताजी मटर का स्वाद बाजार की मटर से अक्सर बेहतर महसूस होता है।
थोड़ी देखभाल से गमले में भरपूर मटर उगाई जा सकती है
गमले में मटर उगाना कठिन नहीं है, लेकिन सही शुरुआत और नियमित देखभाल जरूरी है। अच्छा गमला, उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त धूप, संतुलित पानी और समय पर सहारा देने जैसी बातें यदि ध्यान में रखी जाएं, तो एक छोटे से गमले में भी अच्छी मात्रा में मटर प्राप्त की जा सकती है। यह न केवल गार्डनिंग का आनंद बढ़ाती है बल्कि आपको ताजी और पौष्टिक सब्जी भी उपलब्ध कराती है।
यह भी पढ़ें: Monsoon Compost Guide: जैविक खाद बनाने के लिए मानसून क्यों है सबसे अच्छा मौसम?



