Flower Gardening

Hibiscus Growing Tips: सिर्फ कुछ दिनों में गुड़हल में बढ़ सकती है फूलों की संख्या

Hibiscus Growing Tips: गुड़हल का पौधा लगभग हर भारतीय गार्डन में आसानी से देखने को मिल जाता है। इसके बड़े, आकर्षक और चमकीले फूल घर की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देते हैं। लाल रंग के अलावा आजकल पीले, गुलाबी, नारंगी और डबल पंखुड़ियों वाले गुड़हल की कई किस्में भी उपलब्ध हैं। हालांकि बहुत से लोगों की यह शिकायत रहती है कि उनका गुड़हल का पौधा हरा-भरा तो है, लेकिन उसमें फूल बहुत कम आते हैं या लंबे समय तक फूल बिल्कुल नहीं खिलते। यदि आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देकर आप अपने गुड़हल के पौधे में फूलों की संख्या काफी बढ़ा सकते हैं।

भरपूर धूप गुड़हल के लिए सबसे जरूरी है

गुड़हल एक ऐसा पौधा है जिसे अच्छी मात्रा में धूप की आवश्यकता होती है। यदि पौधे को रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे सीधी धूप नहीं मिलेगी, तो फूलों की संख्या कम हो सकती है। कई लोग इसे छांव या कम रोशनी वाली जगह पर रख देते हैं, जिससे पौधा तो बढ़ता रहता है लेकिन फूल बनना प्रभावित हो जाता है।

मेरे अनुभव में धूप वाली जगह पर रखा गया गुड़हल अधिक स्वस्थ रहता है और उसमें लगातार नई कलियां बनती रहती हैं। यदि आपका पौधा कम फूल दे रहा है, तो सबसे पहले उसकी जगह बदलकर ऐसी जगह रखें जहां उसे पर्याप्त धूप मिल सके।

सही खाद से बढ़ती है फूलों की संख्या

गुड़हल में ज्यादा फूल लाने के लिए केवल पानी देना पर्याप्त नहीं होता। इसे नियमित रूप से संतुलित पोषण की जरूरत होती है। वर्मी कम्पोस्ट, अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद और कम्पोस्ट खाद पौधे को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं और मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधारती हैं।

फूल आने के समय पोटैशियम और फॉस्फोरस विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। केले के छिलकों से बनी खाद या बोन मील जैसी जैविक खादें भी कई गार्डनर्स द्वारा उपयोग की जाती हैं। हालांकि अत्यधिक नाइट्रोजन वाली खाद से बचना चाहिए क्योंकि इससे पत्तियां तो तेजी से बढ़ सकती हैं, लेकिन फूलों की संख्या कम हो सकती है।

समय-समय पर कटिंग करना जरूरी है

गुड़हल के पौधे में नई शाखाओं पर अधिक फूल आते हैं। इसलिए समय-समय पर इसकी हल्की छंटाई या प्रूनिंग करना काफी फायदेमंद माना जाता है। सूखी, कमजोर और अंदर की ओर बढ़ने वाली शाखाओं को हटाने से पौधे में नई टहनियां निकलती हैं और फूल आने की संभावना बढ़ जाती है।

Hibiscus Growing Tips
समय-समय पर कटिंग करना जरूरी है

मैंने कई बार देखा है कि जिन पौधों की नियमित प्रूनिंग की जाती है, वे अधिक घने और फूलों से भरे हुए दिखाई देते हैं। हालांकि बहुत अधिक कटिंग करने से बचना चाहिए और इसे सही मौसम में ही करना बेहतर रहता है।

पानी देने का सही तरीका अपनाएं

गुड़हल को न तो बहुत ज्यादा पानी पसंद है और न ही लंबे समय तक सूखी मिट्टी। मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना सबसे अच्छा माना जाता है। यदि गमले में पानी जमा रहेगा, तो जड़ों में सड़न की समस्या हो सकती है और फूल आने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

गर्मियों में पौधे को अधिक पानी की जरूरत हो सकती है, जबकि बारिश के मौसम में सिंचाई कम करनी चाहिए। हमेशा पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत की नमी जांच लेना एक अच्छी आदत है।

गमले का आकार भी असर डालता है

यदि गुड़हल लंबे समय से छोटे गमले में लगा हुआ है, तो उसकी जड़ों के फैलाव में बाधा आ सकती है। इससे पौधे की ग्रोथ और फूल दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में पौधे को बड़े गमले में स्थानांतरित करना फायदेमंद हो सकता है।

नया गमला चुनते समय यह ध्यान रखें कि उसमें पर्याप्त ड्रेनेज होल हों और मिट्टी उपजाऊ तथा अच्छी जल निकासी वाली हो। स्वस्थ जड़ें ही भरपूर फूलों की नींव होती हैं।

कीट और रोगों पर नजर रखना भी जरूरी है

एफिड्स, मेलीबग्स और अन्य छोटे कीट कई बार गुड़हल के पौधे की नई कलियों और पत्तियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे फूल आने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए समय-समय पर पौधे की जांच करते रहना जरूरी है।

यदि शुरुआती अवस्था में कीट दिखाई दें, तो नीम तेल का स्प्रे उपयोगी साबित हो सकता है। साथ ही संक्रमित पत्तियों या शाखाओं को हटाना भी जरूरी होता है ताकि समस्या फैलने न पाए।

थोड़ी सी देखभाल से गुड़हल बन सकता है फूलों से लदा पौधा

यदि आप चाहते हैं कि आपके गुड़हल के पौधे में ज्यादा फूल आएं, तो उसे भरपूर धूप, संतुलित जैविक खाद, नियमित प्रूनिंग और सही मात्रा में पानी देना जरूरी है। इसके साथ-साथ कीट नियंत्रण और समय-समय पर मिट्टी की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सही तरीके से देखभाल करने पर गुड़हल का पौधा साल के अधिकांश समय खूबसूरत और रंग-बिरंगे फूलों से भरा रह सकता है, जिससे आपके घर और गार्डन की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है।

यह भी पढ़ें: Banana Peel Fertilizer: 15 दिन तक इस्तेमाल किया, जानिए पौधों में क्या बदलाव आया

Devika N

देविका पिछले 8 वर्षों से गार्डनिंग और पौधों से जुड़े विषयों पर लेखन कर रही हैं। इन्हें होम गार्डनिंग, किचन गार्डन, पौधों की देखभाल, जैविक खेती और मौसमी पौधों की गहरी समझ है। अपने अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर ये पाठकों को आसान, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी प्रदान करती हैं। Contact – n.devika@bagwaniexpert.in

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button